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Monday, October 24, 2016

शीघ्रपतन Premature Ejaculation अर्थात वीर्य का सेक्स में समय पूर्व निकल जाने का रोग,कारण व इलाज

शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) सैक्स करते समय स्त्री की सन्तुष्टि से पहले  वीर्य का निकल जाना शीघ्रपतन कहलाता है।

इस रोग में  रोगी चाहकर भी वीर्य को रोक नही पाता है इस रोग से रोगी ही नही अपितु उसका यौन साथी भी परेशान हो जाता है क्योंकि उसे भी सैक्स सन्तुष्टि नही मिल पाती है कई बार इस कारण से सैक्स सहयोगिनी या पार्टनर उल्टा सीधा कहती है गाली भी दे देती है,अतः इस रोग से ग्रसित पुरुष कई बार लज्जा के कारण कुछ कह नही पाता वल्कि वर्दाश्त करता रहता है।शीघ्र पतन की सबसे गंभीरावस्था जब होती है जबकि सम्भोग क्रिया शुरू होते ही या होने से पहले ही पुरुष का  वीर्यपात हो जाता है।सेक्स की समयावधि कितनी होनी चाहिए अर्थात कितनी देर तक वीर्यपात नहीं होना चाहिए, इसका कोई निश्चित मापदण्ड नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति पर निर्भर होता है।
शीघ्रपतन समय से पहले वीर्य का निकल जाना है। यह “समय” कोई निश्चित समय नहीं है पर जब “एंट्री” हुयी नही कि “एक्सिट” हो गया या स्त्री-पुरुष अभी चरम पर न हो और स्खलन हो जाए तो यह शीघ्रपतन  है। ऐसे में पुरुष के मन में असंतुष्टि, ग्लानी, हीन-भावना, नकारात्मक विचारो का आना एवं उसकी स्त्री साथी के साथ संबंधों में तनाव आना संभव है। लीजिये मेरी दूसरी बेवसाइट पर इसी विषय से संबंधित लिंक
The Light Of Ayurveda: लो शीघ्रपतन की असर कारक व सस्ती सी दवा:
 इसके अलावा अन्य प्रयोग भी हैं जिनका प्रयोग करके आप अपने इस रोग का इलाज कर सकते हैं।

Shighrapatan Treatment

पति पत्नी में हेल्दी रिलेशनशिप के लिए दोनो ही पार्टनरों का सेक्स में संतुष्ट होना भी बहुत जरुरी है, लेकिन शीघ्रपतन याअर्ली इजेकुलेशन(Early Ejaculation) एक ऐसा रोग है जिसमें रोग तो पुरुष को होता है लैकिन दुःखी स्त्री होती है क्योंकि इस  रोग में शीघ्रपतन की  समस्या के कारण वह जल्दी ही झड़ जाता है और निष्चेष्ठ हो जाता है और महिला को यौन संतुष्टि नहीं मिल पाती है और वह विन पार लगी नैया के समान छटपटाती रह जाती है, किन्तु लगातार अगर उसे इसी समस्या से दो चार होना पड़े तो उसे भी अनिद्रा,  रोग को दूर करने के लिए आप  निम्न लिखित उपाय करके आप इस समस्या से मुक्त हो सकते हैं। वास्तव में ये सभी प्रयास एक प्रकार की सैक्स एक्सरसाइज ही कही जा सकती हैं।

* सेक्स के लिए उचित समय और उचित स्थान का चयन करें। ऐसे स्थान का चयन करें जो दोनों सेक्स पार्टनर को आनंद की अनुभूति कराए।
* सेक्स संबंध बनाते समय मन में किसी तरह का का भय, चिंता, घबराहट नहीं होना चाहिए और इस काम में कोई जल्दबाजी न करें।
* संभोग करते समय पहले अपने पार्टनर को उत्तेजित करने में अधिक समय लगाएें। यदि इस दौरान इरेक्शन हो जाए तो भी चिंतित न हों। सेक्स आराम का काम है इस काम में जल्दबाजी बिलकुल नकरें। याद रखें एक स्त्री को उत्तेजित होने में पुरुष से ज्यादा समय लगता है।
* संभोग की प्रक्रिया मे बीच-बीच में रुकें और फिर शुरू करें। रुकने के दौरान अपने पार्टनर का चुंबन करें और उसके नाजुक अंगों को सहलाएं।
* यदि आपको डायविटीज की समस्या है तो उसे कंट्रोल करें साथ ही शराब का कम से कम सेवन करें। याद रहे शराब का ज्यादा सेवन आपकी सेक्स लाइफ के लिए नुकसानदायक है।
* अपने पार्टनर से देर तक फोरप्ले  करते हुये बातचीत करें और  ध्यान फोरप्ले  पर दें तथा  पार्टनर के प्राइवेट अंगों को सहलाते हुये उत्तेजित करें।
*जो लोग योग करते हैं वे  अश्विनी मुद्रा का अभ्यास करें। जो इसे नही जानते उन्हैं इसे जानकर सेक्स का समय बढ़ा सकते हैं।
* इसके अलावा योग के जानकार वज्रोली मुद्रा से भी सेक्स समय को बढ़ा सकते हैं।

शिघ्रपतन के कारण,शीघ्र स्खलन का घरेलू इलाज,शीघ्रपतन के आयुर्वेदिक उपाय,शीघपतन का इलाज


Thursday, February 7, 2013

मस्तिष्क की दुर्वलताव धातु कमजोरी में घी बादाम योग

धातु दोर्बल्य या धातु की कमजोरी ऐसा रोग है जो अनेकों रोगों का कारण भी बन जाता है जैसा कि आप भी जानते होगें कि विना बल के शरीर रोगों का घर बन जाता है अतः धातु की कमजोरी को दूर करने का एक बहतरीन योग आपको उपलब्ध करा रहा हूँ पढ़े व फायदा उठावे वैसे भी इस समय सर्दियों का मौसम है तो इस समय अगर आप योग प्रयोग करेंगे तो ज्यादा फायदा होगा।
तो लिखो भइया योग बनाने की सामिग्री ः
  1. बादाम की मींग 50 नग 
  2. चिरोंजी 10 ग्राम
  3. गोला की गिरी 10 ग्राम
  4. खरबूजे की मींग 10 ग्राम
  5. पिश्ता 10 ग्राम
  6. छोटी इलायची 10 ग्राम
  7. दालचीनी 10 ग्राम
  8. शतावर 15 ग्राम
  9. असगंध 15 ग्राम
  10. तालमखाना 15 ग्राम
  11. केशर 01 ग्राम
  12. गाय का घी 500 ग्राम
बनाने की विधि ः अब सारे मेवाओं व दवाओं को अलग अलग लेकर  खूब बारीक बारीक खरल कर लें फिर घी को धीमी आग पर चढ़ा दे जब लालिमा सी आ जावे तो मेवाऐं व दवाए  डालकर पका लें नीचे उतार कर इसमें बारीक पीस कर केशर व ज्यादा व जल्दी फायदे के लिए वंग भस्म 5 ग्राम डाल लें और छान कर  रख लेंवें
मात्रा व सेवन विधि ः 5 से 10 ग्राम लेकर इस घी को मिश्री युक्त दूध से लेकर रात्रि शयन करते समय प्रयोग करें ।यह योग सभी प्रकार के यौन दोर्बल्य धातु क्षरण, आदि में शीघ्र लाभ कारी है तथा स्तम्भन शक्ति प्रदान करने बाला योग भी है।
जिन युवकों या काम सेवन के इच्छुक पुरुषों के लिंगोंत्थान में प्रोब्लम रहती है वे लिंग के अनुत्थान की अवस्था में ही लिंग पर 5-10 बूँद की मात्रा में इस घी की मलें तो कुछ समय में ही लिंगोंत्थान की समस्या या ध्वजभंग की समस्य़ा दूर हो जाती है।
इसका सबसे वढ़िया प्रयोग है मस्तिष्क की दुर्वलता में जब यह औषधि नही महाऔषधि का कार्य करता है। 

Friday, January 4, 2013

लो खाओ अब ठण्ड का काम तमाम करने बाले मेथी दाने के लड्डू

लो खाओ अब ठंड का काम तमाम करने वाले लड्डू
भयंकर सर्दिया आ गई है अब सबका हाल वेहाल है एसे में कुछ एसा हो जाए जो युबाओ व वृद्धो को ताकत से भरपूर कर दैं किसी दिन की पोस्ट मे इन लड्डुओ का विस्त्रित वर्णन करुगा आज तो केवल विधि ही लिख लो और खाना शुरु कर दो जाड़े से राहत मिलेगी और जिन वड़े बूढ़ो को दर्द की प्रोब्लम है वह भी प्रभु करेगे तो जल्दी ही ठीक हो जाएगी।
सामग्री : Fenugreek sweet
150 ग्राम मैथीदाने का पावडर, 200 ग्राम पिसा गोंद, 50 ग्राम गेहूं का आटा, 125 ग्राम पिस्ता, 125 ग्राम बादाम, केसर के कुछ लच्छे ,1 किलो शुद्ध देसी घी, 300 ग्राम शकर का बूरा, खोपरा बूरा 100 ग्राम, इलायची पावडर आधा चम्मच।
विधि :
एक कड़ाही में घी गर्म करके उसमें आटा डालकर धीमी आच पर भूनें। तत्पश्चात इसी गर्म घी में बारीक पिसा गोंद डालें। इस सामग्री को कुछ ठंडा होने दें। घी कुनकुना होने पर इसमें मैथीदाना पावडर डालें (गर्म घी में मैथी कड़वी हो जाती है)।

तैयार इस सामग्री को दो दिन इसी प्रकार रहने दें, जिससे मैथीदाना पावडर घी को अच्छी तरह पी लें। अब उबले हुए गर्म पानी में इस सामग्री का बर्तन रखकर उसे गर्म करें। घी पिघल जाने पर उसमें खोपरा बूरा, पिस्ता, बादाम, केसर, इलायची व शक्कर का बूरा डालकर अच्छी तरह हाथ से मसलकर एक जैसा कर लें।

अब इसके छोटे-छोटे लड्डू बनाएं। विशेषकर ठंड के दिनों में इन लड्डुओं को खाया जाता है। इसे खाने से महिलाओं को कमर दर्द में मुक्ति मिलती है।
(साभार वेव दुनिया से ) 

Saturday, December 29, 2012

खाँसी व क्षय की अचूक दवा है -महाकालेश्वर रस

 खाँसी की अचूक दवा है -महाकालेश्वर रस

यह औषधि सभी प्रकार की खाँसी ,क्षय या टी.बी. श्वांस, यक्ष्मा, सन्निपात, कण्ठरोग, अभिन्यास, मूर्छा आदि को दूर करती है।

महाकालेश्वर रस निर्माण सामिग्री- 

लौह भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म, स्वर्ण माक्षिक भस्म, शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हिंगुल, शुद्ध सींगिया विष, जायफल, लोंग, दालचीनी, छोटी इलायची, नागकेशर, धतूरे के बीज और शुद्ध जमालगोटा 1-1 तौला तथा काली मिर्च 3 तौला।

महाकालेश्वर रस निर्माण विधि ----

पहले पारद व गंधक की कज्जली बना लें। फिर सभी अण्डर लाइन औषधियों को बारीक कूट कर चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण को कज्जली में डालकर तथा भस्में भी बारीक करके डाल कर मिला लें। फिर सभी मिश्रण को भाँग की पत्तियों के साथ 21 भावनाऐं देकर 1-1 रत्ती की छोटी -2 गोलियाँ बना लें।याद रहै घोटने के लिए मूसली लोहै की ही प्रयोग करनी है।

महाकालेश्वर रस की मात्रा व सेवन विधि- 

इस औषधि की अधिकतम मात्रा 1 रत्ती ही है यह ध्यान रखें अतः एक गोली से ज्यादा न दें।बच्चों, वृद्धों व दुर्वल मनुष्यों को तो मात्रा और भी कम यानि कि आधी गोली ही दें।अनुपान में इस दवा को अदरख के रस के साथ दें।

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Friday, December 28, 2012

खाँसी की सरल गोलियाँ

खाँसी को दूर करने के लिए वैसे तो बहुत से योग उपलब्ध हैं ही पर फिर भी एक सरल दवा यदि घर में बनाकर रखी जा सके तो उत्तम ही रहैगी।
सत्यानाशी की कोमल जड़ काट कर लावें और छाया में सुखा कर चूर्ण कर लेवें तथा सूखी जड़ के बराबर मात्रा में काली मिर्च मिलाकर लहसुन के रस में 3 घण्टे तक घोटकर चने के बराबर की गोलियाँ बना लें।तथा इन्हैं छाया में ही सुखाऐं ।
मात्रा व सेवन विधि - दिन में 2-3 बार 1 -1 गोली ताजा पानी के साथ लेते रहैं।इसके अलाबा खाँसी के वेग के समय पर भी मुँह में डालकर चूसते रहैं।अति तीव्र खाँसी को भी यह शीघ्र ही कंट्रोल कर देती है।

सभी प्रकार खांसी दूर करने का नुस्खा ः कासावलेह

कई बार बच्चों व बड़ो को सूखी खाँसी,कफ खाँसी,वलगमी खाँसी व पित्तज तथा वातज अनेको प्रकार की खाँसी की प्रोव्लम हो जाती है जिससे खाँसते खाँसते पेट भी दुखने लगता है और गंभीर स्थिति बन जाती है।कई बार सर दर्द हो जाता है।लो अब हम आपको ऐसा योग बताने जा रहै हैं जो इन उपद्रवों का तत्काल ही अंत कर देगा।
सामिग्री-
  1.  वंश लोचन 10 ग्राम
  2. छोटी इलायची के दाने 8 ग्राम
  3. गोंद बबूल 6 ग्राम
  4. गोंद कतीरा  6 ग्राम
  5. मुलहठी 6 ग्राम
  6. काशीफल या कद्दू की गिरी  6 ग्राम
  7. दालचीनी 2 ग्राम
  8. छोटी पीपल 3ग्राम
  9. काली मिर्च 3 ग्राम
  10. बादाम की गिरी 10 ग्राम
  11. लिसोड़े पके हुये 15 नग 
सभी काष्ठ औषधियों को कूट व कपड़छन करके उसमें अन्य द्रव्य मिला कर बारीक करके पीसकर
 खरल करें तथा 100 ग्राम छोटी मधुमक्खी का शहद मिलाकर रखें 
मात्रा- इस अबलेह की 2-3 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार सेवन करावें।इससे सभी प्रकार की खाँसी मिट जाती है।

Thursday, December 27, 2012

खासान्तक सीरप -खाँसी दूर करने का आयुर्वेदिक सीरप

सर्दी के समय में खाँसी एक आम रोग के रुप में पैदा हो जाता है।इससे छोटे -2 बच्चे टीन एजर व प्रोण व वृद्ध सभी दुःखी रहते हैं।तो आज में इसी रोग को समाप्त करने के लिए एक पानक या पेय को बनाने की विधि बता रहै हैं जिससे आपका रोग समाप्त हो सके।यह एक बार बना कर रखा जा सकता है।
सामिग्री  व निर्माण विधि- भटकटैया का पंचाग 500 ग्राम,काकड़ासिंगी 180 ग्राम,मुलहठी 25 ग्रा,अड़ूसा के पत्ते 10 ग्राम,पीपल 5 ग्राम,और मिश्री 1किलो 500ग्राम, सभी जौकुट करके मिश्री से अलग 1 लीटर पानी के साथ काड़ा बना लें।जब चौथाई शेष रह जाए तब उतारे और ठण्डा होने पर छान लें।अब इस छने हुये क्वाथ में मिश्री मिलाकर पकाऐं,जब दो तार की चासनी तैयार हो जाए तब मामूली सी पिपरमेंट पीसकर डाल दें।बस सीरप तैयार हो गया।
मात्रा-यह चम्मच यह शर्बत दिन में 3-4 बार तक दे सकते हैं।इससे सब प्रकार की खाँसी में आराम मिलता है।सूखी खाँसी में कफ निकलकर बैचेनी दूर होकर राहत मिल जाती है।पुरानी खाँसी,क्षयजन्य खाँसी,कच्चा कफ निकलना,गला खराव होना,आवाज बैठना,गले में खरास आदि में यह सीरप बहुत ही हितकर है।इससे वुखार में भी आराम मिलता है। 
 
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